इत्तेफाक (Part 2)



#इत्तेफाक ❤️
#02
कल तो मै लेट हो गया था पर आज मै लेट होना चाह रहा था । मै जानबूझ कर लेट कर रहा था इस उम्मीद की शायद आज भी वो दिख जाए । पता नहीं उसके लिए इतना बेचैन क्यों हो रहा था ।
बस फिर नाश्ता किया और चल दिया घर से। और ना जाने क्यों आज पूरी रोड साफ थी कोई ट्रैफिक नहीं। मैं फिर भी स्लो स्पीड में बाइक चलाते हुए देख रहा था। और ऐसे ही ऑफिस भी पहुंच गया पर वो लड़की खी भी दिखाई नहीं दी। थोड़ा उदास हो गया, सच कहूं तो बहुत उदास था ,क्यों ..इसका जवाब तो मेरे पास भी नहीं था। मै उदास मन लिए चल दिया । फिर सारा काम ख़तम कर घर आया । खाना खा के अपनी रोज की आदत की तरह डायरी लिखी फिर सोने की कोशिश  करते हुए सोच म डूब गया इस  कि चलो आज नहीं शायद कल दिख जाए।  पता नहीं क्यों मै इतना बेचैन हूं उसके लिए । मन में बहुत से क्यों उठ रहे थे पर उनमें से किसी भी क्यों का जवाब  मेरे पास नहीं थी । यही सब सोचते हुए कब आंख लगी पता ही नहीं चला ।
#मॉर्निंग
आज फिर लेट घर से निकला और आज भी मुझे वो कहीं नहीं दिखाई दी। आज फिर मन उदास हो गया।
यही सिलसिला कुछ दिन चला मेरा लेट जाना उसका ना दिखना इस वजह से ऑफिस से भी डांट पड़ने लगी । फिर मैने भी उम्मीद छोड़ दी उसके मिलने की ।
अब रोज अपने टाईम से ऑफिस जाने लगा ।
आज उस बात को एक महीना हो गया था । कहने को तो मैने उम्मीद छोड़ दी उसके मिलने की पर मन  में एक आस लिए था बस ।
आज जैसे ही  ऑफिस में अपने टेबल पर पहुंचा था साथ म एक ओर टेबल लगा था  शायद कोई नया जॉइन हुए है। यही सब सोच रहा था कि बॉस ने बुला लिया ।
फिर बॉस ने जो कहा........

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