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Until I Bow Down(Autobiography) Chapter 2

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  Chapter 2 Abi tak mujhe nhi pta tha ki mere saath kya hua h... meri aankhe fir khuli....is waqt me apni mmi ki godh me tha.....mmi muje  godh me le ke hmare gaav k auto stand par baithi hui thi...wo Kisi Gadi ya Auto aane ke wait me baithi hui thi...mmi ke sath 2 oarte or thi...jinka face mujhe ab dhyan nhi h....mmi ki aankho me aansu the ....m kuch bolna chah raha tha....lekin fir  meri aankhe band ho gyi........  muje kuch sor sunai diya....Meri aankhe fir khuli....abi bhi m mmi ki goadh me hi tha...Maine dekha ham ek Jeep(car) me the....abki bar maine mmi se puchha,"Mmi ham kahaa Ja rahe hai?" Mmi ne kaha,"beta ateli jaa rahe hai teri tabiyat thodi khrab ho gyi h docter ko dikhane jaa rahe h"......iske baad Meri aankhe fir band ho gyi Iske baad...Mmi papa ka Kahna hai ki Muje Ateli Government Hospital me admit kiya gya...Lekin unhone meri Condition Dekhte hue.. Kuch Formalities ke sath muje Rohtak P.G.I.M.S.  Madical Science and hospital me refer kar diya.....

Until I Bow Down(Autobiography)Chapter 1

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  ALS(Life Story) Chapter 1 Hi Mera Naam Sachin hai m haryana se hu mera birth 27 oct 1995 me hua....mujse phle meri bdi sister ka birth hua tha ...jinki birth k bad death ho gyi thi meri ek chhoti sis or ek chhota bhai h ghr me papa log 3 bhai h or mere dada ji 4 bhai the...isliye meri family bahut bdi h iske sath mere dada ji k papa yaani mere pad dada ji...wo 2 bhai the..  hmari family k kuch log gurugram or delhi me rahte h... Mmi-Papa btate hai mere birth k time hmari family me bahut problems chl rahi thi....apas me ldaiya hoti rhti thi....family puri bikhri hui thi....mere famly k kuch log jail me bhi the....inhi problems k chlte merw birth pr koi celebration nhi hua...sath me mmi papa ka khna h ki mera birth hmari famly ko jodne k liye hua tha syd...bcz mere birth k bad family fir se banne lgi...or jab m 7 year ka hua to kuch esa accident hua jis se hmari puri family ek ho gyi......is incident ko btane se pahle mere mmi papa ki btai hui mere bachpan ki batein share krna...

मदर्स डे

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मदर्स डे रजनी  सुबह सबको चाय दे कर घर के झाड़ू पोछा लगाने में लग जाती है ।  तभी देखती है कि उसके दोनों बच्चे रजत और सौम्या अभी तक नहीं उठे थे , " अरे तुम दोनों उठे नहीं अभी तक टाईम देखो क्या हो गया ,चलो उठो मुझे सफाई भी करनी है इस कमरे की।" रजनी दोनों को उठाते हुए  कहती है । रजत और सौम्या  उठ कर सोफे पर फोन लेकर बैठ जाते है । और रजनी रोज की तरह झाड़ू लगा रही थी तभी रजत फोन में देखते हुए बोलता है - अरे आज तो मदर्स डे है । फिर रजत कर सौम्या जल्दी से रजनी के पा स जाते है और कुछ सेल्फी लेने लगते हैं "अरे ममी ये झाड़ू और कूड़ा नीचे फेको ना फोटो में अच्छा नहीं आ रहा है " , ये कहते हुए सौम्या सब नीचे फेक देती है । और कुछ फोटो लेने के बाद वो वापस से फोन में लग जाते है । " ये देख सौम्या  मेरा मदर्स डे का कैप्शन अच्छा है ना " रजत सौम्या को अपने फोन में वही पिक दिखाते हुए कहता है सौम्या - हा भाई  बहुत अच्छा है । रजनी उन्हें देख अवाक सी रह जाती है वो एक नजर फर्श पर बिखरे हुए कूड़े को देखती है जिसे उसने अभी अभी ही साफ किया था , और एक नजर अपने दोनों बच्चो...

IMPORTANCE ( मां)

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IMPORTANCE (Maa) रात  के 11 बज रहे थे और आरुषि अभी भी अपना ऑफिस का काम कर थी थी । काम करते करते उसे टाईम का पता ही नहीं चला । तभी उसे किसी की आवाज़ आती है। वो दरवाजे की तरफ देखती है तो सामने  उसकी मा खड़ी थी  " तू अभी तक नहीं सोई आरू " उसकी मा ने कहा आरुषि - बस सोने ही वाली थी मम्मा  आप सो जाइए, मै भी सो जाउंगी  " हा हा पता है मुझे तू कितना सोएगी , चल बन्द कर अब ये सब कल कर लेना " ये कहते हुए वो बेड पर बैठ गई  आरुषि - हा बस हो गया  काम खत्म कर आरुषि अपनी मा की गोद में सिर रख कर लेट गई  आरुषि - वैसे आप क्यों नहीं सोई अभी तक  " तू रात रात तक जगी रहेगी तो मुझे नींद कैसे आएगी भला"ये कहते हुए वह आरुषि के बल सहलाने लगी  आरुषि - आप भी ना  बहुत ज्यादा सोचती है  " हा हा अब हूं तो सोचूंगी ही जब नहीं रहूंगी तब पता चलेगा"  आरुषि - हा हा तब की तब देख लेंगे अभी सी जाओ आप भी  तभी आरुषि हड़बड़ा कर उठती है और देखती है कि वो काम करते करते ही सो गई थी ,  वह पास में देखती है तो वहा कोई नहीं था सिर्फ उसकी फाइल्स और पेपर्स बिखरे पड़े ...

ASPECTS

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THE ASPECTS "mom I don't wanna eat this. this is so boring . get me some spicy food ",  a 10 year old boy said to his mother. but son this is healthy for you  . her mother said. " no ,i won't eat this  its tasteless" . he said ok baby i will order some spicy food for you ok . now smile  , her mother said " yeahhh . u are great mom  i love you" "i love you to my baby " rani , he dont wanna eat it so throw it in dustbin ok  , she said to her maid ok mam ,her maid said . . . . .  other side " mom i am hungry , we hadn't eaten anything  since yesterday . pleas make somthing na mom."  , a little boy said to his mother beta, we have nothing to eat and  we don't have enough money to buy somthing . she said. he   gets upset.   baby come to me I will tell you a awesome story and once it is over ,  I will give you  lots of biscuits .  she said while taking him in her arms really mumma  , he said in...

तलाकशुदा

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short story तलाकशुदा घ र पहुंची ही थी कि दरवाजे से देखा पड़ोस कि कुछ औरतें  मा के साथ बैठी हुई है  अरे आ गई बेटा , मा ने मुझे देखते हुए कहा "जी मां " "कैसी हो अनु " , पड़ोस की एक आंटी ने मुझसे पूछा ठीक हूं आंटी, मैंने कहा और बता राकेश के साथ कैसा रहा, बात बनी क्या,   उन्होंने पूछा जी , मुझे अजीब लगा वो थोड़ा और फिर उसका एक बेटा भी है अरे तो तू भी तो तलाकशुदा है ऐसे ही रिश्ते मिलेंगे अब तो तुझे , कोई पहली शादी थोड़ी है दूसरी शादी है तेरी भी तो, आंटी ने जवाब देते हुए कहा उनकी बात सुन कर मै बस मुस्कुराई और अपने रूम में चली गई  पर वहा से भी उनकी बाते साफ सुनाई दे रही थी जो वो मेरी मां से कह रही थी "दीदी एक तो पहली शादी लव मैरिज और फिर तलाक का ठप्पा भी लगा है मै तो कहती हूं कर दो इसकी शादी समय पर , अव रिश्ते तो ऐसे ही मिलेंगे  और फिर कब तक मायके में रहेगी वो " ये सब सुन कर मै खुद से ही सवाल करने लगी , क्या तलाक इतना बड़ा ठप्पा है मेरे चरित्र पर  या हर लडकी पर , जो उसे ऐसे  जज किया जाता है जैसे वो कोई इंसान नहीं एक  वस्तु ह...

वापसी

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 वापसी short story वानी रेलवे स्टेशन पर बैठे बैठे रोहित का इंतजार कर रही थी। वो उसे कई मेसेज , कॉल कर चुकी थी लेकिन रोहित की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था उसकी आंखो से आसू लगातार बह रहे थे। उसे कुछ कुछ  अंदाजा तो हो गया था रोहित के रिप्लाइ ना देने का पर कमबख्त दिल ये मानने को तैयार ना था। वो  आंखे बन्द कर के एक गहरी सास लेती  है, उसके मन में वही सब चल रहा था जो कुछ एक घंटे पहले हुआ... अभय( वानी के पिता)- ये क्या है वानी इतने खराब मार्क्स . ये बोर्ड का साल था तुम्हारा और तुम ये मार्क्स लाई हो , इससे कहा एडमिशन मिलेगा तुम्हे ,क्या करोगी तुम, क्या करना चाहती हो बताओ मुझे " मैं कर लूंगी पापा मुझे जो भी करना होगा आप फिक्र मत लो मेरी"  - वानी ने उनकी बातों को नजरंदाज करते हुए कहा अभय - मैं फिक्र ना करू ...सच में वानी?😟😕  मेरी बात सुनो वानी मै तुम्हे तुम्हारे विनय अंकल के पास भेज रहा हूं उनसे बात कर ली है मैने , वहा के कॉलेज में तुम्हारा एडमिशन करवा देंगे वो। और मुझे रिज़ल्ट अच्छा चाहिए वहा का। ठीक है? वानी - मै कही नही जाऊंगी पापा । मैं...